सिलसिला आने-जाने का— हिंदी कविता

हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ, Image Source: Google Image

आज हिन्दी दिवस के सुअवसर पर कुछ अपनी मातृभाषा में लिखने की इच्छा है। आशा है पाठकों को पसंद आएगी 🙏🙏🌹🌹

मौसम आते हैं, मौसम जाते हैं,

दिन यूँ ही कटते चले जाते हैं,

सुबह होती है, तो शाम का इंतज़ार होता है,

रातें आती हैं, तो सुबह का इंतज़ार होता है,

एक त्योहार बीतता है, तो अगले का इंतज़ार होता है,

लोग आते हैं, लोग चले जाते हैं,

बस, एक हम हैं, जो वहीं के वहीं,

खड़े, देखते रह जाते हैं,

आने-जाने का ये निरन्तर सिलसिला,

जीवन-चक्र का एहसास दिला जाता है ।

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संत कबीर के दोहे

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St. Kabir Das—The famous Indian poet, saint and social reformer, whose poems, couplets, teachings are still relevant, although he composed them in 15th century.

Famously known as “Kabir ke dohe”, teaches us the important lessons of life. Sharing some of them here, on Kabir Jayanti.

Shubh Buddha Purnima— My Thoughts

Buddha, Picture by ©Chitrangadasharan

ख़ुशी और आनंद दो अलग-अलग तरह की अनुभूति होती है ।

जब हम बुद्ध की प्रतिमा को देखते हैं,

तो ये नहीं कहते, कि वह कितने खुश प्रतीत होते हैं,

किन्तु ये कहते हैं, कि वह कितने आनन्दमय प्रतीत होते हैं,

ख़ुशी तो भौतिक चीजों से प्राप्त की जा सकती है,

लेकिन आनन्द तो आत्मा के सुख से ही प्राप्त होता है,

हमें ये प्रयत्न करना चाहिए, कि अपने तथा दूसरों के जीवन में,

आनन्द ही आनन्द हो।

शुभ बुद्ध पूर्णिमा 🙏🙏

A Visit to Bodh Gaya, Bihar, India

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बड़े शहरों की बातें

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बड़े शहरों की, बड़ी है हैं बातें,

ऊँची इमारतें, ऊँची ख्वाहिशें,

सब कुछ तो है यहाँ,

पर सुकून ना जाने कहाँ,

किसको फ़ुरसत है,

ज़्यादा आसमान देखें,

बस मुट्ठी भर ही काफ़ी है।

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भाई-बहन— कुछ यादें, कुछ विचार

Rishtey/ Relationships, Picture by ©Chitrangadasharan

कितनी अजीब बात है ना, कि जब भाई-बहन अपने माता-पिता के घर बड़े हो रहे होते हैं, तो एक दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते हैं ।

साथ- साथ खेलना, पढ़ना, घुमना- फिरना, खाना, सोना, शैतानियाँ भी करना, एक दूसरे को डाँट और बड़ों की सज़ा से भी बचाना।

फिर समय बीतता जाता है, भाई-बहन बड़े हो जाते हैं, उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर भी जाना होता है, या फिर ज़ॉब के लिए।

कभी हर समय साथ साथ रहने वाले भाई-बहन धीरे-धीरे दूर होते चले जाते हैं ।

फिर सब की शादी होने के बाद नए-नए रिश्ते बनते हैं।

रिश्ते निभाना भी एक कला है । सहनशीलता, धैर्य, परस्पर सम्मान, और भी कई बातें ज़रूरी होती हैं।

कभी इन सब बातों की परवाह किए बिना जो भाई-बहन का रिश्ता बड़े मज़े में निभता था, उसमें भी इन बातों का ख़्याल रखना ज़रूरी होता है ।

इतना कुछ मुश्किल भी नहीं है । समय के साथ विवेक भी तो बढ़ता है ।

लेकिन फिर से वही बात दोहराना चाहती हूँ— रिश्तों को सम्भालने की कला आनी चाहिए ।

क्योंकि उसी में परम सुख और शांति है। फिर चाहे वो कोई भी रिश्ता हो।

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पारिजात—हिन्दी कविता

Parijat Flower from my garden
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कहते हैं कि, पारिजात समुद्र मंथन में उत्पन्न हुआ था,

कहते हैं कि, पारिजात तो स्वर्ग से पृथ्वी पर आया था,

इसकी दैवीय सुन्दरता को देखकर तो ऐसा ही लगता है,

भाग्यशाली हूँ मैं, कि ये मेरे बगीचे में मुस्कुरा रहा है।

©चित्रांगदा ©Chitrangada

Parijat Flower from my garden
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खुबसूरत अतीत—हिन्दी कविता

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पुरानी अलमारी में, कुछ पुरानी यादें,

कुछ हाथों से लिखे ख़त,

कुछ शेरों-शायरी, कुछ सूखे फूल,

कुछ सहेलियों का पता,

चेहरे पे मुस्कान लिए,

सोचती हूँ मैं,

सब कुछ कितना बदल गया है,

बस यादें रह जाती हैं,

एक खूबसूरत अतीत की ।

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फिर से सावन आया—कविता

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आज फिर कुछ यादों ने दस्तक दी है,

सावन के साँवरे बादलों ने,

जब बारिशों के आने की आहट दी है,

आज फिर कुछ यादों ने दस्तक दी है ।

हरी-हरी घास, और हरे पत्तों ने,

फ़िज़ा को एक रुहानी सी रौनक़ दी है,

आज फिर कुछ यादों ने दस्तक दी है।

जैसे कल ही की बात हो,

बम्बई की सड़कों पे हम,

बारिश की फुहारों के संग,

हाथों में हाथ लिए,

एक छाता साथ लिए,

भीगते चलते थे हम,

यूँ ही गुनगुनाते हुए,

नज़रों से नज़रें मिलाते हुए,

आज फिर बारिशों का मौसम आया है,

और कुछ यादों ने दस्तक दी है,

हाँ, कुछ उम्र बीत गयी है,

फिर भी- – – – – – – –

आज फिर कुछ यादों ने दस्तक दी है ।

©चित्रांगदा शरण

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