Buddha, Picture by ©Chitrangadasharan

ख़ुशी और आनंद दो अलग-अलग तरह की अनुभूति होती है ।

जब हम बुद्ध की प्रतिमा को देखते हैं,

तो ये नहीं कहते, कि वह कितने खुश प्रतीत होते हैं,

किन्तु ये कहते हैं, कि वह कितने आनन्दमय प्रतीत होते हैं,

ख़ुशी तो भौतिक चीजों से प्राप्त की जा सकती है,

लेकिन आनन्द तो आत्मा के सुख से ही प्राप्त होता है,

हमें ये प्रयत्न करना चाहिए, कि अपने तथा दूसरों के जीवन में,

आनन्द ही आनन्द हो।

शुभ बुद्ध पूर्णिमा 🙏🙏

A Visit to Bodh Gaya, Bihar, India

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