Rishtey/ Relationships, Picture by ©Chitrangadasharan

कितनी अजीब बात है ना, कि जब भाई-बहन अपने माता-पिता के घर बड़े हो रहे होते हैं, तो एक दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते हैं ।

साथ- साथ खेलना, पढ़ना, घुमना- फिरना, खाना, सोना, शैतानियाँ भी करना, एक दूसरे को डाँट और बड़ों की सज़ा से भी बचाना।

फिर समय बीतता जाता है, भाई-बहन बड़े हो जाते हैं, उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर भी जाना होता है, या फिर ज़ॉब के लिए।

कभी हर समय साथ साथ रहने वाले भाई-बहन धीरे-धीरे दूर होते चले जाते हैं ।

फिर सब की शादी होने के बाद नए-नए रिश्ते बनते हैं।

रिश्ते निभाना भी एक कला है । सहनशीलता, धैर्य, परस्पर सम्मान, और भी कई बातें ज़रूरी होती हैं।

कभी इन सब बातों की परवाह किए बिना जो भाई-बहन का रिश्ता बड़े मज़े में निभता था, उसमें भी इन बातों का ख़्याल रखना ज़रूरी होता है ।

इतना कुछ मुश्किल भी नहीं है । समय के साथ विवेक भी तो बढ़ता है ।

लेकिन फिर से वही बात दोहराना चाहती हूँ— रिश्तों को सम्भालने की कला आनी चाहिए ।

क्योंकि उसी में परम सुख और शांति है। फिर चाहे वो कोई भी रिश्ता हो।

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